रविवार, 8 अप्रैल 2012
शनिवार, 18 फ़रवरी 2012
कुत्ते की मौत!!
जवान लड़कियां
आती हैं
समाज में,
मर्दों पर,
एहसान के वास्ते,
लड़कियां भी,
ये समझती हैं,
बखूबी की वो,
कुछ अलग हैं,
लार टपकाते,
... कुत्तों के बीच,
दिखाती हैं,
अपनी अदायीं,
उन्हें,
मालूम होता है, कुत्तों की लार,
और,
अपनी सफलता के बीच के,
रिश्तों की कहानी,
का सच,
आदिम कुत्ते,
सौंप देते हैं,
अपनी सत्ता,
लड़कियों के,
हाथो में,
आसानी से,
चुपचाप,
लड़कियां,
ऊपर उठ जाती हैं,
और इतरा के,
कहती हैं,
'ये मेरी उपलब्धि है'...
कुत्ते,
लार टपकाते-टपकाते, एक दिन,
मर जाते हैं,
निहायत ही 'कुत्ते की मौत'.....
निहायत ही 'कुत्ते की मौत'.....
सोमवार, 19 दिसंबर 2011
खुद में उसको 'जिलाए' जी रहा हूँ...!!!
बारिश की बूंदे भी बेहद तल्ख़ लगती हैं,
की जब दामन पे पड़ती है तो एहसां सा करती हैं!
इतने एहसानों का बोझ उठाये फिर रहा हूँ,
उस से इक 'मुस्कराहट' की आस लगाये जी रहा हूँ,
...
मैं जानता हूँ वो कभी 'हँसेगी' नहीं,
फिर भी रोज़ दिल को बहलाए जी रहा हूँ,
ये भरम भी हसीं है, किसी ख्वाब की मानिंद,
ख्वाबों की इक फेहरिस्त बनाये जी रहा हूँ...
वो इस कदर बाबस्ता है रूह से मेरी,
की अब खुद में उसको 'जिलाए' जी रहा हूँ...!!!
की जब दामन पे पड़ती है तो एहसां सा करती हैं!
इतने एहसानों का बोझ उठाये फिर रहा हूँ,
उस से इक 'मुस्कराहट' की आस लगाये जी रहा हूँ,
...
मैं जानता हूँ वो कभी 'हँसेगी' नहीं,
फिर भी रोज़ दिल को बहलाए जी रहा हूँ,
ये भरम भी हसीं है, किसी ख्वाब की मानिंद,
ख्वाबों की इक फेहरिस्त बनाये जी रहा हूँ...
वो इस कदर बाबस्ता है रूह से मेरी,
की अब खुद में उसको 'जिलाए' जी रहा हूँ...!!!
मंगलवार, 14 दिसंबर 2010
आँखों से आँखों का हाल पूछना है
आँखों से आँखों का हाल पूछना है ...
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| कैसे करती हो ये कमाल? |
बाकी है जो दिल में वो मलाल पूछना है ...
आँखे झुकती हैं तो हया भी गश खाती है,
कैसे करती हो ये कमाल? पूछना है
कैसे हो जाती है पूरी तुम्हारी मन्नते सारी?
दुआ में उठती उन आँखों का जलाल पूछना है ...
मेरी याद में जब आँखें बहाती हैं आंसू ,
तब होता है दिल कितना बेहाल? पूछना है ...
पूछना है ये, वो भी पूछना है,
कैसे गुज़ारा इतना साल? पूछना है...
मंगलवार, 7 दिसंबर 2010
स्वास्तिका : गंगा की बेटी गंगा के हवाले
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| रोती गंगा, रोते घाट.... |
"चलो रे डोली उठाओ कहार, पिया मिलन की रुत आई....
६ साल की स्वस्तिका के लिए इस गाने का मतलब थोडा अलग है... उसकी डोली वो पत्थर है जिस से उसके बेजान शरीर को बंधा गया, और उसके पिया वो भगवान हैं जिनसे उसका आज मिलन हुआ... अगर महसूस कर सको तो उस बाप की वेदना महसूस करो, जो उसे गोद में उठा कर अंतिम संस्कार को ले आया... ६ साल की बेटी का भार उसके लिए नया नहीं है, ऐसा ही भार उसके सो जाने पर अक्सर महसूस करता था ये अभागा बाप, मगर अब उसके उठने का इंतज़ार किसी को नहीं है....जिन घाटो पर वो खेल के बड़ी हुई, जिन घाटों को उसके ब्याह की शहनाइयां सुननी थी... वो आज उसकी मौत की गवाह बन गयी...कल बनारस के घाट पर एक विस्फोट हुआ और स्वस्तिका की मौत की वजह बन गया.. गंगा मौन है, मगर गंगा की धारा की चीत्कार और सिसकियों के स्वर हर कोई महसूस कर रहा है...
६ साल की स्वस्तिका के लिए इस गाने का मतलब थोडा अलग है... उसकी डोली वो पत्थर है जिस से उसके बेजान शरीर को बंधा गया, और उसके पिया वो भगवान हैं जिनसे उसका आज मिलन हुआ... अगर महसूस कर सको तो उस बाप की वेदना महसूस करो, जो उसे गोद में उठा कर अंतिम संस्कार को ले आया... ६ साल की बेटी का भार उसके लिए नया नहीं है, ऐसा ही भार उसके सो जाने पर अक्सर महसूस करता था ये अभागा बाप, मगर अब उसके उठने का इंतज़ार किसी को नहीं है....जिन घाटो पर वो खेल के बड़ी हुई, जिन घाटों को उसके ब्याह की शहनाइयां सुननी थी... वो आज उसकी मौत की गवाह बन गयी...कल बनारस के घाट पर एक विस्फोट हुआ और स्वस्तिका की मौत की वजह बन गया.. गंगा मौन है, मगर गंगा की धारा की चीत्कार और सिसकियों के स्वर हर कोई महसूस कर रहा है...
किसने किया और किसने कराया ये बम विस्फोट? जांच होगी और पता चल जायेगा, मगर स्वस्तिका का बाप हर रोज़ घाट पर आएगा... इस उम्मीद में की शायद आज उसे यहीं कहीं खेलती स्वस्तिका मिल जाए..
इस बम विस्फोट पर मुझे कुछ नहीं कहना.. और न ही सरकार-प्रशासन पर ही कोई टिपण्णी करनी है.. आज तो बस देश में कश्मीर और देश की सीमाओं से आगे आकर गहरे तक पैठ बना चुके आतंकवाद पर मुझे मशहूर लेखक शिव खेडा की वो बात याद आ रही है... "अगर आप के पडोसी पर अन्याय हो रहा है, और आप चुप होकर घर में बैठ जाते हैं, तो यकीन मानिये, कल आपका ही नंबर है..." क्या स्वास्तिका के पिता श्री संतोष कुमार शर्मा के पडोसी और हम सब ये समझ पा रहे हैं?
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