शुक्रवार, 11 जनवरी 2013
शनिवार, 13 अक्टूबर 2012
अधूरे से हैं हम भी...
बड़ी दुश्वारियां हैं,
एक सीधी राह चलने में,
तुम्हारे आह भरने में,
हमारे सांस लेने में.
मगर तुम ये नहीं मानोगी,
की हम भी प्यार करते हैं,
बड़ी उम्मीद से हर बार,
ये इकरार करते हैं,
है अब भी वक़्त,
गर तुम समझ पाओ,
अधूरे से हैं हम भी,
और अधूरे तुम भी हो लेकिन,
यही है प्रश्न, इसका हल,
हम कहाँ से ले आये?
सोमवार, 8 अक्टूबर 2012
नहीं आया
हमको हवाओं के संग बहाना नहीं आया
हमको कश्ती को चुपचाप खेना नहीं आया,
वो सब आ गया जो गुनाह था,
उनकी नज़र में,
मगर उनके पैमानों पे कभी तुलना नहीं आया...
इबादतों की इन्तेहाँ...
मेरी इबादतों की इन्तेहाँ तो देखो,
मीलों दूर से उनकी आहठ समझ लेता हूँ...
मीलों दूर से उनकी आहठ समझ लेता हूँ...
है ये इश्क नहीं फिर भी चलो यूं ही,
तुम्हारे कहने पे इसे इश्क समझ लेता हूँ...
था जो सुकून तेरी बंदिशों में बाबस्ता,
उसी को सोच के आज भी सो लेता हूँ...
रविवार, 30 सितंबर 2012
कभी महबूब की तरह!
पैबस्त है तुझसे मेरी तकदीर इस तरह,
पाने की आस में हो फ़कीर जिस तरह...
बेचारगी देख खुद की, उदास शाम से हूँ,
मजबूर बिन परवाज़ परिंदा हो जिस तरह...
पढने को तेरी आँखें हैं पर कैसे पढ़े हम,
बे-दीद हूँ, सावन का अँधा हो जिस तरह...
तेरा देखना उधर, तेरा देखना इधर,
देखा नहीं मुझे कभी उम्मीद की तरह...
गर समझ पाए तू मेरे चेहरे की इल्तजा,
आये बाँहों में कभी महबूब की तरह...
गर समझ पाए तू मेरे चेहरे की इल्तजा,
आये बाँहों में कभी महबूब की तरह...
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