दिल की नज़र से....

दिल की नज़र से....
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गुरुवार, 19 अप्रैल 2012

'स्वाति' से बताना मुश्किल है...

रोने के बहाने लाखो हैं,
हसने का बहाना थोड़ा है,
जीने के लिए इस दुनिया में,
जीने का बहाना थोड़ा है...

हर आग उगलती चट्टानों में,
एक झील की चाहत होती है,
हर धूप के दिल में बारिश की,
बूंदों की तमन्ना पलती है...

पर गम के मारे लोगों का,
मुश्किल से ठिकाना थोड़ा है...

हर रात मुझे सिखलाती है,
तन्हाई कैसे कटती है?
हर भोर मुझे समझाती है,
इक दिन सूरज भी चमकेगा...
हर रात भोर तक जीने का
अंदाज़ नया बतलाती है...

बस यादों के अक्स तले,
हर रात निभाना मुश्किल है...

तेरी आमद के संग आयीं,
कुछ ख़ास तमन्ना फिर दिल में,
फिर जश्ने -बहारां दिन आये,
फिर मौसम बदला बदला है,
पर तेरी चुप की इस रात तले,
आस-दीप जलाना मुश्किल है...

तू मेरी है मैं तेरा हूँ,
ये तय है जन्मो-जन्मों से,
बस याद दिलाना है तुझको,
'हम तड़प रहे हैं जन्मों से..'

पर 'चातक' की प्यास बुझे कैसे?
'स्वाति' से बताना मुश्किल है...

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