दिल की नज़र से....

दिल की नज़र से....
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बुधवार, 3 दिसंबर 2014

यही है रे जीवन...

ये वक़्त है 
एक घोड़ा-गाड़ी 
भागता है - रुकता है 
धीमा हो जाता है 
घोड़े के गले में बंधे घुँघरू 
तब भी खनकते हैं 
जब गाड़ी बिलकुल रुकी होती है 
वक़्त चले-रुके या बदले 
जीवन संगीत नहीं रुकता 
घोड़े के गले के घुँघरू 
यही कहते हैं 
छन-छन, बीतेगा हर छण यूँ ही 
मत सोच क़ाफ़िला निकल गया 
बस अपनी रफ़्तार बढ़ा 
हौले से फिर हाँक जीवन की गाड़ी 
सुनता जा घुँघरू की छन-छन... 
यही है रे जीवन।  

2 टिप्‍पणियां:

ankur kumar Jha ने कहा…

गंभीर बातें सर।

ankur kumar Jha ने कहा…

बातों ही बातों में गंभीर बातें !जबर्दस्त